अपठित काव्यांश 


2. निम्नलिखित काव्यांशों तथा इन पर आधारित प्रश्नोत्तरों को ध्यानपूर्वक पढ़िए -

निर्भय स्वागत करो मृत्यु का,

मृत्यु एक है विश्राम-स्थल।

जीव जहाँ से फिर चलता है,

धारण कर नस जीवन संबल।

मृत्यु एक सरिता है, जिसमें

श्रम से कातर जीव नहाकर


फिर नूतन धारण करता है,

काया रूपी वस्त्र बहाकर।

सच्चा प्रेम वही है जिसकी -

तृप्ति आत्म-बलि पर ही निर्भर

त्याग बिना निष्प्राण प्रेम है,

करो प्रेम पर प्राण निछावर ।


प्रश्न

(क) कवि ने मृत्यु के प्रति निर्भय बने रहने के लिए क्यों कहा है?

(ख) मृत्यु को विश्राम-स्थल क्यों कहा गया है?

(ग) कवि ने मृता की तुलना किससे और क्यों की है?

(घ) मृत्यु रूपी सरिता में नहाकर जीव में क्या परिवर्तन आ जाता है?

(ङ) सध्ये प्रेम की बया विशेषता बताई गई है और उसे कब निष्प्राण कहा गया है?


2.जीवन एक कुआ है।

अधाह- अगम

सबके लिए एक सा वृत्ताकार।

जो भी पास जाता है,

सहज ही तृप्ति, शांति, जीवन पाता है

मगर छिद्र होते हैं जिसके पात्र में

रस्सी-डोर रखने के बाद भी,

हर प्रयत्न करने के बाद भी

यह यहाँ प्यासा-का-प्यासा रह जाता है।

मेरे मन! तूने भी, बार-बार

बड़ी बड़ी रसियाँ बटी

रोज-रोज कुएँ पर गया


तरह-तरह घड़े को चमकाया,

पानी में डुबाया, उतराया

लेकिन तू सदा ही -

प्यासा गया, प्यासा ही आया ।

और दोध तूने दिया

कभी तो कुएं को

कभी पानी को

कभी सब को

मगर कभी जॉचा नहीं खुद को

परखा नहीं पड़े की तली को ।

चीन्हा नहीं उन असंख्य छिद्रों को

और मूढ़ अब तो खुद को परख देख।


प्रश्न

(क) कविता में जीवन को कुआँ क्यों कहा गया है? कैसा व्यक्ति कुएँ के पास जाकर भी प्यासा रह जाता है।

(ख) कवि का मन सभी प्रकार के प्रयासों के उपरांत भी प्यासा क्यों रह जाता है।

(ग) और तूने दोष दिया……कभी सबकों का आशय क्या है।

(घ) यदि किसी को असफलता प्राप्त हो रही हो तो उसे किन बातों की जाँच-परख करनी चाहिए?

(ङ) 'चीन्हा नहीं उन असंख्य छिद्रों को - यहाँ असंख्य छिद्रों के माध्यम से किस ओर संकेत किया गया है ?


3.अपने नहीं अभाव मिटा पाया जीवन भर

पर औरों के सभी भाव मिटा सकता हैं।

तूफानों-भूचालों की भयप्रद छाया में,

मैं ही एक अकेला हूँ जो गा सकता हैं।


मेरे में की संज्ञा भी इतनी व्यापक है,

इसमें मुझसे अगणित प्राणी आ जाते हैं।

मुझको अपने पर अदम्य विश्वास रहा है।

में खंडहर को फिर से महल बना सकता है।


जब-जब भी मैंने खंडहर आबाद किए हैं,

प्रलय मेध भूधाल देख मुझको शरमाए।

में मजदूर मुझे देवों की बस्ती से क्या ।

अगणित बार धरा पर मैंने स्वर्ग बनाए।




प्रश्न

(क) उपर्युक्त काव्य-पंक्तियों में किसका महत्व प्रतिपादित किया गया है?

(ख) स्वर्ग के प्रति मजदूर की विरक्ति का क्या कारण है?

(ग) किन कठिन परिस्थितियों में उसने अपनी निर्भयता प्रकट की है।

(घ) मेरे मैं की संज्ञा भी इतनी व्यापक है, इसमें मुझ से अगणित प्राणी आ जाते हैं।

उपर्युक्त पंक्तियों का भाय स्पष्ट कर लिखिए।

(ङ) अपनी शक्ति और क्षमता के प्रति उसने क्या कहकर अपना आत्म-विश्वास प्रकट किया है?


4.अपने नहीं अभाव मिटा पाया जीवन भर

पर औरों के सभी भाव मिटा सकता हैं।

तूफानों-भूचालों की भयप्रद छाया में,

मैं ही एक अकेला हूँ जो गा सकता हैं।


मेरे में की संज्ञा भी इतनी व्यापक है,

इसमें मुझसे अगणित प्राणी आ जाते हैं।

मुझको अपने पर अदम्य विश्वास रहा है।

में खंडहर को फिर से महल बना सकता है।


जब-जब भी मैंने खंडहर आबाद किए हैं,

प्रलय मेध भूधाल देख मुझको शरमाए।

में मजदूर मुझे देवों की बस्ती से क्या ।

अगणित बार धरा पर मैंने स्वर्ग बनाए।




प्रश्न

(क) उपर्युक्त काव्य-पंक्तियों में किसका महत्व प्रतिपादित किया गया है?

(ख) स्वर्ग के प्रति मजदूर की विरक्ति का क्या कारण है?

(ग) किन कठिन परिस्थितियों में उसने अपनी निर्भयता प्रकट की है।

(घ) मेरे मैं की संज्ञा भी इतनी व्यापक है, इसमें मुझ से अगणित प्राणी आ जाते हैं।

उपर्युक्त पंक्तियों का भाय स्पष्ट कर लिखिए।

(ङ) अपनी शक्ति और क्षमता के प्रति उसने क्या कहकर अपना आत्म-विश्वास प्रकट किया है?


5.नदीन कंठ दो कि मैं नवीन गान गा सकू,

स्वतंत्र देश की नवीन आरती सजा सकें।

नदीन दृष्टि का नया विधान आज हो रहा,

नवीन आसमान में विहान आज हो रहा,

खुली दसों दिशा खुले कपाट ज्योति-द्वार के-

विमुक्त राष्ट्र सूर्य भासमान आज हो रहा।

युगांत की व्यथा लिए अतीत आज रो रहा,

दिगंत में वसंत का भविष्य बीज बो रहा,

कुलीन जो उसे नहीं गुमान या गरूर है,

समर्थ शक्तिपूर्ण जो किसान या मजूर है।

भविष्य द्वार मुक्त से स्वतंत्र भाव से चलो,

मनुष्य बन मनुष्य से गले मिले चले चलो,

समान भाव के प्रकाशवान सूर्य के तले-

समान रूपगंध फूल-फूल-से खिले चलो।


सुदीर्घ क्रांति झेल, खेल की ज्वलंत भाग से-

स्वदेश बल सँजो रहा की थकान खो रहा।

प्रबुद्ध राष्ट्र को नवीन वंदना सुना सकू,

नवीन बीन दो कि मैं अगीत गान गा सकें!

नए समाज के लिए नदीन नींव पड़ चुकी,

नए मकान के लिए नवीन ईट गढ़ चुकी,

सभी कुटुंब एक, कौन पारा, कौन दूर है।

नए समाज का हरेक व्यक्ति एक नूर है।

पुराण पथ में खड़े विरोध वैर भाव के

त्रिशूल को दले थलो, बबूल को मले थलो।

प्रवेश-पर्व है स्वदेश का नवीन वेश में

मनुष्य बन मनुष्य से गले मिलो चले चलो।

नवीन भाव दो कि मैं नवीन गान गा सकू,

नवीन देश की नवीन अर्चना सुना सकू!"


प्रश्न

(क) कवि नई आवाज की आवश्यकता क्यों महसूस कर रहा है।

(ख) नए समाज का हरेक व्यक्ति एक नूर है-आशय स्पष्ट कीजिए।

(ग) कवि मनुष्य को क्या परामर्श दे रहा है?

(घ) कवि किस नवीनता की कामना कर रहा है।

(ङ) किसान और कुलीन की क्या विशेषता बताई गई है?


6.जिसमें स्वदेश का मान भरा

आजादी का अभिमान भरा

जो निर्भय पथ पर बढ़ आए

गौ महाप्रलय में मुस्काए ।


अंतिम दम हो रहे है?

दे दिए प्राण, पर नहीं हटे।

जो देश-राष्ट्र की वेदी पर

देकर मस्तक हो गए अमर

ये रक्त तिलक भारत ललाट!


उनको मेरा पहला प्रणाम !

फिर वे जो ऑधी बन भीषण

कर रहे भाज दुश्मन से रण

बाणों के पवि संधान बने ।

जो चालामुख-हिमवान बने

हैं टूट रहे रिपु के गढ़ पर

बाधाओं के पर्वत चकर

जो न्याय-नीति को अर्पित हैं।

भारत के लिए समर्पित हैं।

कीर्तित जिससे यह भरा धाम

उन दीरों को मेरा प्रणाम


श्रद्धानत कवि का नमस्कार

दुर्लभ है छंद-प्रसून हार

इसको बस वे ही पाते हैं।

जो चढे काल पर आते हैं।

हुम्कृति से विश्व काँपते हैं।

पर्वत का दिल दहलाते हैं।

रण में त्रिपुरांतक बने शर्व

कर ले जो रिपु का गर्व खर्च

जो अग्नि-पुत्र, त्यागी, अक्राम

उनको अर्पित मेरा प्रणाम!!!


प्रश्न

(क) कवि किन वीरों को प्रणाम करता है?

(ख) कवि ने भारत के माधे का लाल चंदन किन्हें कहा है।

(ग) दुश्मनों पर भारतीय सैनिक किस तरह वार करते हैं?

(घ) काव्यांश का उपयुक्त शीर्षक लिखिए।

(ड) कवि की श्रद्धा किन वीरों के प्रति है।


7.आज जीत की रात
पहरुए, सावधान रहना।
खुले देश के द्वार
अचल दीपक समान रहना
प्रथम चरण है नये स्वर्ग का
है मंजिले का छोर
इस जन-मंथन से उठ आई
पहली रतन हिलोर
अभी शेष है पूरी होना
जीवन मुक्ता डोर
क्योंकि नहीं मिट पाई दुख की
विगत साँवली कोर
ले युग की पतवार
बने अंबुधि समान रहना
पहरुए, सावधान रहना
ऊँची हुई मशाल हमारी
आगे कठिन डगर है।
शत्रु हट गया, लेकिन उसकी
छायाओं का डर है,
शोषण से मृत है समाज ,
कमज़ोर हमारा घर है।
किंतु आ रही नई जिंदगी
यह विश्वास अमर है।

(क) कविता देश की कौन-सी सुखद घटना की ओर संकेत करती है?
(i) युद्ध में जीत
(ii) 15 अगस्त की सुखद घटना
(iii) गणतंत्र दिवस की सुखद घटना
(iv) विपत्तियों से छुटकारे की रात

(ख) ‘पहरुए’ की ‘दीपक’ और ‘अंबुधि’ के समान बने रहने को क्यों कहा गया है?
(i) क्योंकि दीपक ही प्रकाश देता है और अपनी गहराई से सबको प्रेरणा देता है।
(ii) दीपक और सागर के समान परोपकारी बनने की प्रेरणा
(iii) दीपक और सागर के समान अटल बनने की प्रेरणा
(iv) दीपक और सागर की तरह महान बनने की प्रेरणा

(ग) शोषण से मृत है समाज कमज़ोर हमारा घर है – पंक्ति का अर्थ क्या है?
(i) देश की हालत खास्ता है।
(ii) देश की आर्थिक स्थिति दयनीय है।
(iii) देश की सामाजिक स्थिति ठीक नहीं है।
(iv) देश की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था कमजोर है।

(घ) ‘ले युग की पतवार बने अंबुधि समान रहना’ पंक्ति में अलंकार है?
(i) उत्प्रेक्षा
(ii) रूपक
(iii) उपमा
(iv) मानवीकरण

8. ऐसा है आवेश देश में जिसका पार नहीं।
देखा माता का ऐसा रक्तिम श्रृंगार नहीं।
कंठ-कंठ में गान उमड़ते माँ के वंदन के।
कंठ-कंठ में गान उमड़ते माँ के अर्चन के।
शीश-शीश में भाव उमड़ते माँ पर अर्पण के।
प्राण-प्राण में भाव उमड़ते शोणित तर्पण के।
जीवन की धारा में देखी ऐसी धार नहीं।
सत्य अहिंसा का व्रत अपना कोई पाप नहीं।
विश्व मैत्री का व्रत भी कोई अभिशाप नहीं।
यही सत्य है सदा असत की टिकती चाप नहीं।
सावधान हिंसक! प्रतिहिंसा की कोई माप नहीं।
कोई भी प्रस्ताव पराजय का स्वीकार नहीं।
ऐसा है आवेश देश में जिसका पार नहीं।

(क) उपरोक्त पद्यांश में किसके आवेश’ का उल्लेख हुआ है?
(i) माता के
(ii) देश के
(iii) शत्रु के
(iv) इनमें से कोई नहीं

(ख) कवि के मतानुसार असत्य है
(i) स्थायी
(ii) व्रत
(iii) अभिशाप
(iv) अस्थायी

(ग) ‘रक्ति श्रृंगार’ का अर्थ है
(i) वीर सपूतों का रक्त बलिदान करना
(ii) रक्त बहाना
(iii) शत्रु का खून बहाना ।
(iv) उपरोक्त में से कोई नहीं

(घ) ‘शोणित तर्पण’ का अर्थ है
(i) खून बहाकर आक्रमणकारी के पितरों का श्राद्ध करना
(ii) शत्रु का शोषण करना
(iii) दुखी होकर श्राद्ध करना
(iv) वीर सपूतों का रक्त बलिदान करना

(ङ) पद्यांश में ‘माता’ का प्रतीक है–
(i) देवी की
(ii) विश्वमैत्री की
(iii) सत्य-अहिंसा की
(iv) राष्ट्र (देश) की

9. जग-जीवन में जो चिर महान,
सौंदर्यपूर्ण और सत्यप्राण,
मैं उसका प्रेमी बनूं नाथ!
जिससे मानव-हित हो समान!
जिससे जीवन में मिले शक्ति
छूटे भय-संशय, अंधभक्ति,
मैं वह प्रकाश बन सकें नाथ!
मिल जावे जिसमें अखिल व्यक्ति !

(क) कवि ने ‘चिर महान’ किसे कहा है?
(i) मानव को
(ii) ईश्वर को
(iii) जो सत्य और सुंदर से संपूर्ण हो
(iv) शक्ति को

(ख) कवि कैसा प्रकाश बनना चाहता है?
(i) जिससे सब तरफ उजाला हो जाए।
(ii) अज्ञान का अंधकार दूर हो जाए
(iii) जो जीने की शक्ति देता है।
(iv) जिसमें मनुष्य सभी भेदभाव भुलाकर एक हो जाते हैं।

(ग) कवि ने ‘अखिल व्यक्ति का प्रयोग क्यों किया है?
(i) कवि समस्त विश्व के व्यक्तियों की बात करना चाहता है।
(ii) कवि अमीर लोगों की बात कहना चाहता है।
(iii) कवि भारत के व्यक्तियों की ओर संकेत करना चाहता है।
(iv) कवि ब्रह्मज्ञानी बनना चाहता है।

(घ) कवि ने कविता की पंक्तियों के अंत में विस्मयादिबोधक चिह्न प्रयोग क्यों किया है?
(i) कविता को तुकांत बनाने के लिए
(ii) कवि अपनी इच्छा प्रकट कर रहा है।
(iii) इससे कविता का सौंदर्य बढ़ता है।
(iv) पूर्ण विराम की लीक से हटने के लिए

(ङ) कविता का मूलभाव क्या है?
(i) कल्याण
(ii) अमरदान की प्राप्ति
(iii) विश्व-परिवार की भावना
(iv) सत्य की प्राप्ति

10.ओ महमूदा मेरी दिल जिगरी
तेरे साथ मैं भी छत पर खड़ी हूँ
तुम्हारी रसोई तुम्हारी बैठक और गाय-घर में पानी घुस आया
उसमें तैर रहा है घर का सामान
तेरे बाहर के बाग का सेब का दरख्त
टूट कर पानी के साथ बह रहा है।
अगले साल इसमें पहली बार सेब लगने थे
तेरी बल खाकर जाती कश्मीरी कढ़ाई वाली चप्पल
हुसैन की पेशावरी जूती
बह रहे हैं गंदले पानी के साथ
तेरी ढलवाँ छत पर बैठा है।
घर के पिंजरे का तोता
वह फिर पिंजरे में आना चाहता है।
महमूदा मेरी बहन
इसी पानी में बह रही है तेरी लाडली गऊ
इसका बछड़ा पता नहीं कहाँ है।
तेरी गऊ के दूध भरे थन ।
अकड़ कर लोहा हो गए हैं।
जम गया है दूध
सब तरफ पानी ही पानी
पूरा शहर डल झील हो गया है।
महमूदा, मेरी महमूदा
मैं तेरे साथ खड़ी हूँ।
मुझे यकीन है छत पर जरूर
कोई पानी की बोतल गिरेगी
कोई खाने का सामान या दूध की थैली
मैं कुरबान उन बच्चों की माँओं पर
जो बाढ़ में से निकलकर ।
बच्चों की तरह पीड़ितों को
सुरक्षित स्थान पर पहुँचा रही हैं।
महमूदा हम दोनों फिर खड़े होंगे
मैं तुम्हारी कमलिनी अपनी धरती पर…
उसे चूम लेंगे अपने सूखे होठों से
पानी की इसे तबाही से फिर निकल आएगा
मेरा चाँद जैसा जम्मू
मेरा फूल जैसा कश्मीर।

(क) घर में पानी घुसने का कारण है
(i) नल और नाली की खराबी
(ii) बाँध का टूटना
(iii) प्राकृतिक आपदा
(iv) नदी में रुकावट

(ख) महमूदा की बहन को विश्वास नहीं है
(i) छत पर पानी की बोतल गिरेगी
(ii) कुछ खाने-पीने की सहायता पहुँचेगी
(iii) कोई हैलीकॉप्टर उन्हें बचाने छत पर आएगा
(iv) इस मुसीबत से निकल जाएँगे

(ग) “मेरा चाँद जैसा जम्मू
मेरा फूल जैसा कश्मीर’ का भावार्थ है
(i) जम्मू और कश्मीर में फिर से चाँद दिखने लगेगा,
(ii) जम्मू और कश्मीर का सौंदर्य वापिस लौटेगा,
(iii) जम्मू और कश्मीर स्वर्ग है,
(iv) जम्मू और कश्मीर चाँद और फूल जैसा सुंदर है,

(घ) कवयित्री माताओं पर क्यों न्यौछावर होना चाहती है?
(i) दूसरों को बचाने के कार्य में जुटी हैं।।
(ii) बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुँचा रही हैं।
(iii) स्वयं भूखी रहकर बच्चों की देखभाल करती हैं।
(iv) रसद पहुँचाने का कार्य कर रही हैं।

(ङ) पूरा शहर डल झील जैसा लग रहा है, क्योंकि
(i) डल झील का फैलाव बढ़ गया है।
(ii) पूरे शहर में पानी भर गया है।
(iii) पूरे शहर में शिकारे चलने लगे हैं।
(iv) झील में नगर का प्रतिबिंब झलक रहा है

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

apathit gadyansh mcq class 9 10

ling badlo hindi